हरतालिका तीज पर सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत, मंदिरों में उमड़ी शिव-पार्वती पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़

रायपुर : सुहागिनों का पावन और अखंड सौभाग्य का प्रतीक पर्व हरतालिका तीज (तीजा) आज पूरे प्रदेशभर में अपार श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर आयोजित होने वाले इस पावन अवसर पर महिलाओं ने अपने पतियों की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए पूर्णतः निर्जला और निराहार व्रत रखा है। वहीं, कुमारी कन्याओं ने भी मनचाहा और योग्य वर पाने की कामना के साथ इस कठिन व्रत का अनुष्ठान किया।

​छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में इस त्यौहार का विशेष महत्व है, जहाँ इसे अत्यंत आत्मीयता से ‘तीजा’ के रूप में मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार, इस पर्व के लिए विवाहित बेटियां अपने मायके आती हैं, जिससे गाँवों और शहरों के घरों में एक अलग ही उत्सव का माहौल बना हुआ है। सुबह से ही नदियों, तालाबों और पौराणिक घाटों पर स्नान ध्यान के बाद महिलाओं ने पूजा-अर्चना की तैयारी शुरू कर दी।

​दिनभर उपवास के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा का विधान है। प्रदेश के प्रमुख शिवालयों और देवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। महिलाओं ने अपने-अपने घरों और सामूहिक पूजा मंडपों में बालू अथवा काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की मनमोहक मूर्तियां निर्मित कीं। इसके पश्चात उन्हें नए वस्त्र, बेलपत्र, धतूरा, समी पत्र, आंक के फूल और सोलह श्रृंगार की सामग्रियां अर्पित की गईं।

​पूजा के दौरान हरतालिका तीज की पौराणिक कथा का पाठ किया गया, जिसमें बताया गया कि किस प्रकार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। कथा श्रवण के पश्चात आरती कर महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-शांति की कामना की। पूरे प्रदेश के शिव मंदिर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय माता पार्वती’ के जयघोषों से गुंजायमान रहे।

​तीज पर्व को लेकर बाजारों में भी पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त रौनक देखी गई। साड़ी, श्रृंगार सामग्री, फल, फूल और पूजन सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। मेहंदी रचाने के लिए भी ब्यूटी पार्लरों और बाजारों में देर रात तक कतारें लगी रहीं। महिलाओं ने हाथों में आकर्षक मेहंदी रचाकर पारंपरिक वस्त्रों और आभूषणों में सज-धज कर पूजा-अर्चना की।

​मुख्यमंत्री और शासन के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी प्रदेशवासियों को तीजा पर्व की बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह त्यौहार हमारी सनातन संस्कृति, पति-पत्नी के अटूट प्रेम, त्याग और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। रात्रि जागरण के बाद अगले दिन प्रातःकाल पुनः पूजन कर नदी या जलस्रोत में मूर्तियों के विसर्जन के पश्चात ही पारण कर व्रत को पूर्ण किया जाएगा।

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