हिंदी को भारतीय भाषाओं से जोड़कर समृद्ध बना रही सरकार: अमित शाह

नई दिल्ली September 14: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुंबई में हिंदी दिवस 2026 और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार भारतीय भाषाओं को शासन, विज्ञान और साहित्य से जोड़कर उन्हें और समृद्ध बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भाषाएं अनेक हो सकती हैं, लेकिन भारतीय भावना और देश की आवाज एक रहनी चाहिए।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में राजभाषा विभाग ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ का विस्तार इसका प्रमुख उदाहरण है। उन्होंने बताया कि 51 हजार शब्दों से शुरू हुआ यह शब्दकोश अब करीब 8 लाख शब्दों तक पहुंच चुका है। इसमें 50 हजार से अधिक स्थानीय भाषाओं के शब्द जोड़े गए हैं, जिससे हिंदी अधिक लचीली और समृद्ध हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 तक ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश बन जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली और ओड़िया सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं के शब्दों को हिंदी शब्द-सिंधु में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि राजभाषा विभाग ने ‘भारती-बहुभाषी अनुवाद सारथी’ और भारतीय भाषा अनुभाग जैसी पहल भी शुरू की हैं।

मातृभाषा के महत्व पर जोर देते हुए शाह ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी मातृभाषा के बिना भारत की संस्कृति और समाज को पूरी तरह नहीं समझ सकता। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जब अपनी मातृभाषा में सोचता, विश्लेषण करता और निर्णय लेता है तो उसकी सोच और परिणाम बेहतर होते हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा के साथ एक अन्य भारतीय भाषा सीखने पर दिए गए जोर को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना से जोड़ा।

शाह ने कहा कि भाषाई विवाद खड़ा करने के बजाय भारतीय भाषाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं गुजराती भाषी हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर काम करने में हिंदी के कारण उन्हें कभी कठिनाई नहीं हुई। उन्होंने विनोबा भावे के संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी ने उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों से संवाद करने में मदद की।

गृह मंत्री ने महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति का उल्लेख करते हुए मराठी के साथ कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़ और वारली जैसी भाषाओं के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने वीर सावरकर द्वारा गढ़े और संशोधित किए गए शब्दों को ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ में शामिल किए जाने की जानकारी भी दी।

उन्होंने बताया कि 2019 में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को दिल्ली तक सीमित नहीं रखने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद यह सम्मेलन विभिन्न राज्यों में आयोजित किया जा रहा है। राजभाषा समिति के चार खंड राष्ट्रपति को सौंपे जा चुके हैं और पांचवां खंड तैयार है। उन्होंने कहा कि पांच लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा AI आधारित ‘कंठस्थ 2.0’ को पांच करोड़ से अधिक वाक्यों के साथ विदेशियों के लिए भी उपलब्ध कराया गया है।

इस अवसर पर राजभाषा कीर्ति और राजभाषा गौरव पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही ‘शिव अनादि हैं, अनंत हैं’, ‘भारतीय ज्ञानतंत्र : स्रोत और स्वरूप’, ‘अंधेरों से उजालों तक’, ‘वन्दे मातरम्’ पर केंद्रित विशेष स्मारिका और ‘वंदे मातरम के 150 अध्याय’ सहित विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया गया।

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