रायपुर, 14 सितंबर। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साइबर धोखाधड़ी और विवादित इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन से जुड़े मामलों में बैंकिंग ग्राहकों को राहत देने के उद्देश्य से नई रूपरेखा का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संदिग्ध लेनदेन सामने आने पर बैंक पूरे बैंक खाते को फ्रीज करने के बजाय केवल विवादित लेनदेन में शामिल राशि पर अस्थायी रोक लगा सकेंगे। RBI का यह प्रस्ताव साइबर फ्रॉड की रोकथाम के साथ-साथ उन ग्राहकों को अनावश्यक परेशानी से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिनके खाते जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े पाए जाते हैं।
मसौदे के अनुसार, एक हजार रुपये या उससे अधिक के ऐसे असामान्य अंतरण जिनका संबंध म्यूल अकाउंट या साइबर धोखाधड़ी से होने की आशंका हो, उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी से प्राप्त धन को आगे दूसरे खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। साइबर अपराधी अक्सर एक खाते से दूसरे खाते में रकम भेजकर पैसे के स्रोत को छिपाने का प्रयास करते हैं। ऐसे नेटवर्क की पहचान करना बैंकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
प्रस्तावित व्यवस्था में बैंकों को ग्राहक के सामान्य लेनदेन व्यवहार और प्रोफाइल के अनुरूप न होने वाले अचानक या असामान्य अंतरणों की पहचान के लिए तकनीक आधारित निगरानी मजबूत करनी होगी। बैंक ऐसे लेनदेन पर विशेष ध्यान देंगे जो संदिग्ध पैटर्न दिखाते हों या पहले से चिन्हित साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े खातों तक पहुंच रहे हों। RBI की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित लेनदेन निगरानी और धोखाधड़ी पहचान प्रणाली को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य यह है कि संदिग्ध लेनदेन की जांच करते समय वैध ग्राहक की बैंकिंग गतिविधियां पूरी तरह बाधित न हों। मौजूदा व्यवस्था में साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान कई बार पूरे खाते पर रोक लग जाने से ग्राहकों को अपने जरूरी भुगतान, निकासी और अन्य बैंकिंग गतिविधियों में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। नए प्रस्ताव में कार्रवाई को विवादित राशि तक सीमित रखने से इस समस्या को कम करने की कोशिश की गई है।
RBI का यह कदम साइबर अपराध से निपटने के लिए वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच बढ़ते तकनीकी सहयोग की पृष्ठभूमि में आया है। इसी वर्ष RBI Innovation Hub और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने म्यूल खातों से संबंधित संदिग्ध पहचानकर्ताओं और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए सहयोग मजबूत किया है। इसका उद्देश्य AI आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाना है।

मसौदा निर्देश अगले वर्ष 1 अप्रैल से लागू किए जाने प्रस्तावित हैं। हालांकि बैंक चाहें तो निर्धारित तिथि से पहले भी इन प्रावधानों को अपना सकते हैं। RBI ने साइबर धोखाधड़ी के बदलते स्वरूप को देखते हुए बैंकिंग प्रणाली में तेज, लक्षित और तकनीक आधारित निगरानी को बढ़ावा देने की दिशा में यह प्रस्ताव रखा है।
