भारत ने विकसित किए तीन स्वदेशी एआई मॉडल ‘एका-1’, ‘धीर 2बी’ और ‘धीर 5बी’, बिना इंटरनेट भी कर सकेंगे काम

इंडिया एआई मिशन के तहत विकसित मॉडल, 22 भारतीय भाषाओं सहित अंग्रेजी को समझने में सक्षम एका-1

रक्षा, साइबर सुरक्षा, बैंकिंग, शिक्षा और सरकारी सेवाओं में उपयोग की खुलेंगी नई संभावनाएं

नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत तीन स्वदेशी एआई फाउंडेशनल मॉडल ‘एका-1’, ‘धीर 2बी’ और ‘धीर 5बी’ सार्वजनिक रूप से जारी किए गए हैं। इन मॉडलों को भारतीय कंपनियों ने विकसित किया है। इनका उद्देश्य देश की आवश्यकताओं के अनुरूप सुरक्षित, बहुभाषी और तकनीकी रूप से सक्षम एआई प्रणाली तैयार करना है।

3 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन की उपस्थिति में इन मॉडलों का लोकार्पण किया गया। ‘एका-1’ को सोकेट लैब्स टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड तथा ‘धीर 2बी’ और ‘धीर 5बी’ को जेनटेकआईक्यू एआईटेक इनोवेशंस ने विकसित किया है।

22 भारतीय भाषाओं में सक्षम है एका-1

‘एका-1’ एक उन्नत फाउंडेशनल एआई मॉडल है, जिसमें 26.3 अरब पैरामीटर हैं। इसे लगभग 7.5 ट्रिलियन टोकन के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है। यह भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं के साथ अंग्रेजी में भी काम करने में सक्षम है। इसे गणितीय गणना, कोडिंग, तार्किक विश्लेषण और जटिल कार्यों को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसकी विशेषता यह है कि यह बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोगी साबित हो सकता है।

बिना इंटरनेट भी काम करेंगे धीर मॉडल

जेनटेकआईक्यू द्वारा विकसित ‘धीर 2बी’ और ‘धीर 5बी’ ओपन-सोर्स बहुभाषी एआई मॉडल हैं। ये अंग्रेजी के अलावा 10 भारतीय भाषाओं को समर्थन देते हैं। इन्हें रक्षा, सरकारी विभागों, औद्योगिक संस्थानों और शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित उपयोग के लिए तैयार किया गया है। इनकी विशेषता यह है कि इन्हें इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी स्थानीय कंप्यूटर और अन्य उपकरणों पर संचालित किया जा सकता है। इनके माध्यम से दस्तावेजों का विश्लेषण, आवश्यक जानकारियों की खोज, स्वचालित कार्य निष्पादन और नागरिक सेवाओं से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं। इनके हल्के स्वरूप के कारण मोबाइल उपकरणों पर भी उपयोग की संभावनाएं हैं।

सुरक्षा और गोपनीयता को मिलेगी मजबूती

इन मॉडलों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता एयर-गैप्ड वातावरण में काम करने की क्षमता है। एयर-गैप्ड व्यवस्था ऐसी तकनीकी प्रणाली होती है, जिसे इंटरनेट और बाहरी नेटवर्क से पूरी तरह अलग रखा जाता है। इससे संवेदनशील जानकारियां बाहरी सर्वर तक भेजे बिना स्थानीय स्तर पर एआई का उपयोग संभव होता है। रक्षा प्रतिष्ठानों, सरकारी संस्थानों, बैंकिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में यह व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है।

मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि स्वदेशी एआई मॉडल जारी करना देश में मजबूत और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर एआई इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इनका उपयोग साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादकता और कार्यक्षमता बढ़ाने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और उद्यम आधारित एआई अनुप्रयोगों के लिए इन मॉडलों से नई संभावनाएं खुलेंगी।

इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत चयनित कंपनियों को राष्ट्रीय स्तर की एआई कंप्यूटिंग सुविधाओं और अनुसंधान के लिए सहायता उपलब्ध कराई गई है। इन मॉडलों को एआईकोश (AIKosh) जैसे मंचों के माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, नवाचारकर्ताओं और आम लोगों तक पहुंचाने की योजना है।

भारत सरकार का लक्ष्य ‘मेकिंग एआई इन इंडिया और मेकिंग एआई वर्क फॉर इंडिया’ की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए देश में स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान, रोजगार और नवाचार को प्रोत्साहित करना है। ये तीनों मॉडल इसी दिशा में भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

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