रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक में रखी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना
रक्षा बजट बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये, आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये आवंटित
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, साइबर और अंतरिक्ष तकनीक से सशक्त होगी भारतीय सेना
नई दिल्ली। भारत को रक्षा उत्पादन और सैन्य उपकरणों के निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी तकनीकी रूप से सशक्त सेना तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो वर्तमान के साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का भी प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
रक्षा मंत्री ने 3 नवंबर को राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये बातें कहीं। बैठक का मुख्य विषय भारतीय सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण था। इसमें बदलते युद्ध के स्वरूप, उभरती सुरक्षा चुनौतियों, आधुनिक सैन्य तकनीक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सेना की क्षमताओं को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
12 वर्षों में रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से कम रहने वाला रक्षा निर्यात अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
सरकार का लक्ष्य इस उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इससे घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन मिलने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।
आधुनिकीकरण के लिए रिकॉर्ड रक्षा बजट
रक्षा मंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड रक्षा बजट का उल्लेख किया। इसमें 2.19 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत परिव्यय आधुनिकीकरण और सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि सैन्य क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन, उपलब्ध बजट का प्रभावी उपयोग और तीनों सेनाओं की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना जरूरी है।
आधुनिक युद्ध में एआई और ड्रोन की बढ़ेगी भूमिका
बैठक में भविष्य के युद्धों की तैयारी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियों, मानव रहित विमानों और अन्य प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा उन्नत संचार प्रणालियों की भूमिका पर विचार किया गया। तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त परिचालन योजना और विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य क्षमताओं के एकीकृत उपयोग को भी प्राथमिकता दी गई।
निजी क्षेत्र और डीआरडीओ की महत्वपूर्ण भूमिका
राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा उन्नत हथियारों, मिसाइलों और आधुनिक सैन्य प्रणालियों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योगों की भागीदारी बढ़ा रही है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से लेकर बड़ी कंपनियों तक सभी को रक्षा उत्पादन में अवसर दिए जा रहे हैं।

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रयास को संपूर्ण राष्ट्र का दृष्टिकोण बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, उत्पादन क्षमता और मानव संसाधन का विकास देश की सैन्य शक्ति को नई मजबूती देगा। भारत का यह प्रयास न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि रोजगार, औद्योगिक विकास और वैश्विक रक्षा बाजार में देश की भागीदारी बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
