एनआईटी रायपुर में 20 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित हुआ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्कृष्टता केंद्र, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने किया शुभारंभ

खनन, खनिज, इस्पात और स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित नवाचारों को मिलेगा बढ़ावा, 12 स्टार्टअप पहले ही केंद्र से जुड़े

एनआईटी रायपुर फाउंडेशन और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के बीच हुआ एमओयू

रायपुर, 05 नवंबर 2026/ केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत स्थापित मेइटी-इंडिया एआई छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एआई-सीओई) का शुभारंभ किया। इस केंद्र की स्थापना के लिए 20 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव तथा सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. नल्लाथम्बी कलैसेल्वी, एनआईटी रायपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे, संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमण राव और एनआईटीआरआरएफआईई के बोर्ड निदेशक डॉ. समीर बाजपेयी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे। कार्यक्रम में लगभग 400 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्राध्यापक, शोधकर्ता, स्टार्टअप प्रतिनिधि, उद्योग जगत के सदस्य और विद्यार्थी शामिल थे।

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। एआई अब भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और शासन व्यवस्था को बदलने वाली वर्तमान की महत्वपूर्ण शक्ति बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा और प्रतिभाशाली युवाओं की उपलब्धता के कारण छत्तीसगढ़ के पास खनन, इस्पात और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एआई नवाचार का नेतृत्व करने की अपार संभावनाएं हैं। यह उत्कृष्टता केंद्र भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। उन्होंने विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं से विकसित भारत के निर्माण में नवाचार और उद्यमिता को अपनाने का आह्वान किया।

एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमण राव ने कहा कि इंडिया एआई मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से स्थापित यह केंद्र संस्थान के प्राध्यापकों, विद्यार्थियों और स्टार्टअप को राज्य के खनन, इस्पात और स्वास्थ्य क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ेगा। एनआईटीआरआरएफआईई के माध्यम से शोध को व्यावहारिक एआई समाधानों और नए स्टार्टअप में परिवर्तित करने का प्रयास किया जाएगा।

तीन प्रमुख क्षेत्रों में होगा एआई अनुसंधान और नवाचार

यह उत्कृष्टता केंद्र एनआईटी रायपुर के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (NITRRFIE) द्वारा स्थापित किया गया है। इसे केंद्र सरकार के इंडिया एआई मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ शासन का सहयोग प्राप्त है।

केंद्र में अत्याधुनिक एआई अनुसंधान, स्वदेशी तकनीक विकास, स्टार्टअप को प्रोत्साहन, कौशल विकास और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप एआई आधारित समाधान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों खनन एवं खनिज, इस्पात एवं उद्योग तथा स्वास्थ्य एवं बहुविषयक अनुप्रयोगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस अवसर पर एनआईटीआरआरएफआईई और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएमडीसी) के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। अब तक इस एआई उत्कृष्टता केंद्र के अंतर्गत 12 स्टार्टअप को प्रोत्साहित किया जा चुका है। इसके अलावा स्वास्थ्य एवं बहुविषयक अनुप्रयोगों के क्षेत्र में सहयोग के लिए एनआईटीआरआरएफआईई और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के बीच भी एमओयू किया गया है।

कार्यक्रम का समन्वय एआई-सीओई के प्रधान अन्वेषक डॉ. अनुज के. शुक्ला, एनआईटीआरआरएफआईई के सहायक कुलसचिव एवं प्रभारी अधिकारी पवन कटारिया, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेधा सिंह और इनक्यूबेशन मैनेजर सुनील देवांगन ने किया।

एनआईटी रायपुर और एनआईटीआरआरएफआईई ने छत्तीसगढ़ तथा देश के तकनीकी एवं औद्योगिक विकास के लिए नवाचार, उद्यमिता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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