आधार ऐप से 7.5 करोड़ लोगों ने किया डाउनलोड, 86 लाख से अधिक मोबाइल नंबर हुए अपडेट

यूआईडीएआई ने 300 संस्थाओं को ऑफलाइन सत्यापन की दी सुविधा, डिजिटल पहचान और सुरक्षित सेवाओं के विस्तार को मिली गति

नई दिल्ली, 05 नवंबर 2026/ भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार आधारित ऑफलाइन सत्यापन व्यवस्था के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जनवरी में शुरुआत के बाद अब तक 300 ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (ओवीएसई) को इस व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है। इससे होटल, आतिथ्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, आयोजनों, गिग इकोनॉमी और उपभोक्ता सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में आधार के माध्यम से सुरक्षित एवं सुविधाजनक सत्यापन का दायरा बढ़ेगा।

इस पहल से सेवा प्रदाताओं और आम नागरिकों को सुरक्षित, सहमति आधारित तथा कागजरहित सत्यापन की सुविधा मिलेगी। इसके अंतर्गत नागरिक अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण रखते हुए डिजिटल माध्यम से पहचान सत्यापित करा सकेंगे। यह व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (डीपीडीपी एक्ट) के प्रावधानों के अनुरूप निजता और न्यूनतम डेटा उपयोग को प्राथमिकता देती है।

आधार ऐप के 7.5 करोड़ डाउनलोड, घर बैठे मिल रहीं सुविधाएं

आधार ऐप की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। अब तक इसके लगभग 7.5 करोड़ डाउनलोड दर्ज किए जा चुके हैं। ऐप के माध्यम से नागरिक अपने स्मार्टफोन पर ही आधार से संबंधित विभिन्न सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। इसके जरिए 86 लाख से अधिक मोबाइल नंबर अपडेट किए गए हैं। वहीं, 22.16 लाख पते और 40.25 लाख ई-मेल पते भी अपडेट किए जा चुके हैं। इससे नागरिकों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए आधार केंद्रों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है।

4.6 करोड़ बायोमेट्रिक लॉक-अनलॉक लेनदेन दर्ज

आधार ऐप के माध्यम से डिजिटल सुरक्षा सुविधाओं का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है। अब तक 4.6 करोड़ बायोमेट्रिक लॉक-अनलॉक लेनदेन दर्ज किए गए हैं। इसके अतिरिक्त ऐप के माध्यम से 3.61 लाख आधार लॉक-अनलॉक लेनदेन भी किए गए हैं।

बायोमेट्रिक लॉक-अनलॉक और आधार लॉक-अनलॉक की सुविधाएं नागरिकों को अपनी पसंद के अनुसार आधार संबंधी सुरक्षा पर नियंत्रण रखने तथा व्यक्तिगत जानकारी की निजता बनाए रखने में मदद करती हैं।

यूआईडीएआई की ये पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के विजन और विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप सुरक्षित, सुलभ एवं तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे डिजिटल पहचान व्यवस्था अधिक सुविधाजनक और नागरिक केंद्रित बनने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल सत्यापन का विस्तार होगा।

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