एकीकृत नियंत्रण कक्ष 24 घंटे कर रहा बचाव कार्यों की निगरानी, एनडीआरएफ ने एक सप्ताह में 52 लोगों को बचाया और 2206 को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026। केंद्रीय गृह मंत्रालय देशभर में मॉनसून की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मंत्रालय भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रहा है।
जुलाई 2026 के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश और भूस्खलन की स्थिति बनी है। नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, महाराष्ट्र, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है।

केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से भेजे जा रहे अलर्ट
गृह मंत्रालय का एकीकृत नियंत्रण कक्ष भारत मौसम विज्ञान विभाग, केंद्रीय जल आयोग और भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र सहित अन्य केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से लगातार काम कर रहा है। इसके माध्यम से राज्य और जिला आपातस्थिति संचालन केंद्रों को मौसम एवं संभावित आपदा से संबंधित शुरुआती चेतावनियां समय पर भेजी जा रही हैं।
एकीकृत नियंत्रण कक्ष राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और जिलों तक आवश्यक सूचनाएं पहुंचाने के साथ ही चौबीसों घंटे राहत एवं बचाव अभियानों की निगरानी कर रहा है। इसका उद्देश्य संभावित आपदा की स्थिति में प्रशासन को समय रहते सक्रिय करना और प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाना है।
एनडीआरएफ ने 52 लोगों को बचाया, 2206 को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल एनडीआरएफ राज्य प्रशासन, पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। संवेदनशील क्षेत्रों में एनडीआरएफ की टीमें पहले से तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
पिछले एक सप्ताह के दौरान एनडीआरएफ की टीमों ने प्रभावित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 52 लोगों को सुरक्षित बचाया, जबकि 2206 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। गृह मंत्रालय ने कहा कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी तरह की देरी न हो, इसके लिए केंद्रीय एजेंसियां राज्य सरकारों के साथ लगातार समन्वय कर रही हैं।
रक्षा मंत्रालय भी राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा
गृह मंत्रालय के साथ समन्वय करते हुए रक्षा मंत्रालय ने भी बाढ़ और संकट में फंसे लोगों को बचाने तथा लोगों और आवश्यक सामग्री के परिवहन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। रक्षा संसाधनों को कम से कम समय में सक्रिय कर राहत एजेंसियों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और उसके वितरण में भी सहयोग किया जा रहा है।
असम और अरुणाचल प्रदेश में केंद्रीय टीमों ने किया नुकसान का आकलन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के अनुरूप अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों ने 7 से 10 जुलाई 2026 के बीच अरुणाचल प्रदेश और असम के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। टीमों ने भारी बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया, ताकि राष्ट्रीय आपदा सहायता कोष के तहत दोनों राज्यों को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
इसी क्रम में लगातार बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन करने के लिए एक अन्य अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम 25 जुलाई 2026 से असम के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी।
मॉनसून पूर्व तैयारियों की भी हुई थी समीक्षा
गृह मंत्रालय ने बताया कि संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों की पहले से ही नियमित समीक्षा की जाती रही है। 10 मई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में भीषण गर्मी, लू और मॉनसून पूर्व संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक हुई थी।
इसके बाद 3 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई। चार धाम यात्रा मार्गों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तैयारियों की भी गृह मंत्रालय द्वारा नियमित रूप से निगरानी की जा रही है।
बारिश की कमी में आई कमी
हाल की भारी बारिश के कारण कुछ राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन समग्र रूप से इस वर्ष मॉनसून की स्थिति में सुधार भी दर्ज किया गया है। देश में पहले अनुमानित लगभग 30 प्रतिशत वर्षा की कमी अब घटकर करीब 15 प्रतिशत रह गई है। गृह मंत्रालय और केंद्रीय एजेंसियां बदलते मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और राज्यों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं।
