चेन्नई, 6 नवंबर 2026। देशभर में निवेश योजनाओं, शेयर बाजार में मुनाफे और नौकरी दिलाने के नाम पर 400 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के चेन्नई जोनल कार्यालय ने इस मामले में तमिलनाडु के दो आरोपियों रोशन फियाज और अम्मार को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस संगठित साइबर ठगी नेटवर्क ने देशभर में कम से कम 600 लोगों को अपना शिकार बनाया। ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से इधर-उधर भेजकर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाया जाता था।
ईडी ने दोनों आरोपियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 30 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया था। उन्हें चेन्नई की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
निवेश और नौकरी का झांसा देकर करते थे ठगी
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी और उनके सहयोगी फोन कॉल तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों से संपर्क करते थे। उन्हें आकर्षक निवेश योजनाओं, शेयर बाजार में अधिक लाभ, ऑनलाइन कारोबार और नौकरी दिलाने का प्रलोभन दिया जाता था। विश्वास में आने के बाद लोगों से आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में बड़ी रकम जमा कराई जाती थी।
इसके बाद ठगी की रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर कई बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था। कुछ रकम नकद निकाल ली जाती थी, जबकि बड़ी राशि क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के माध्यम से आगे भेजी जाती थी। विशेष रूप से यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल धन के लेन-देन और उसकी पहचान छिपाने के लिए किया जाता था।
31 बैंक खातों में 300 करोड़ से अधिक का लेन-देन
ईडी की जांच में रोशन फियाज को इस नेटवर्क का प्रमुख संचालक बताया गया है। वह अपने नाम, पत्नी के नाम और विभिन्न व्यावसायिक संस्थानों के नाम पर संचालित बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम का लेन-देन करता था। जांचकर्ताओं को ऐसे 31 बैंक खातों में 300 करोड़ रुपये से अधिक के डेबिट और क्रेडिट लेन-देन का पता चला है।
दूसरे आरोपी अम्मार पर आरोप है कि उसने रोशन फियाज को विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं के बैंक खाते उपलब्ध कराए। इसके साथ ही बैंक खाता किट, नेट बैंकिंग की जानकारी, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और ईमेल आईडी भी उपलब्ध कराई गईं। इनका इस्तेमाल क्रिप्टोकरेंसी खरीदने वाले लोगों से भारतीय मुद्रा में भुगतान प्राप्त करने के लिए किया जाता था।
12 एफआईआर और 600 से अधिक शिकायतों से खुला नेटवर्क
ईडी ने अपनी जांच तमिलनाडु पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम कमांड सेंटर और तेलंगाना के साइबराबाद साइबर क्राइम थाने में दर्ज दो प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। आगे की जांच में तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में दर्ज 10 अन्य प्राथमिकी भी इसी नेटवर्क से जुड़ी पाई गईं। इस प्रकार कुल 12 प्राथमिकी और देशभर से मिली 600 से अधिक साइबर अपराध शिकायतों के आधार पर नेटवर्क का व्यापक स्वरूप सामने आया। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़ी अपराध की अनुमानित आय 400 करोड़ रुपये से अधिक है।
नकदी और क्रिप्टोकरेंसी सहित करोड़ों की संपत्ति जब्त
ईडी ने आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के ठिकानों पर तलाशी के दौरान 14.50 लाख रुपये नकद और लगभग 3.26 करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की है। इसके अतिरिक्त विभिन्न बैंक खातों में जमा 88.28 लाख रुपये की राशि भी फ्रीज की गई है।

ईडी की जांच में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन निवेश और नौकरी के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के संगठित स्वरूप को उजागर किया है। एजेंसी मामले में धन के लेन-देन, बैंक खातों के नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से धन शोधन की अन्य कड़ियों की जांच कर रही है।
