घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं पर सरकार का बड़ा कदम, अब तत्काल निलंबित होगा निर्माण लाइसेंस

औषधि नियम, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव, गुणवत्ता जांच में पांच महत्वपूर्ण मानकों पर विफल दवाओं के खिलाफ होगी त्वरित कार्रवाई

लाइसेंस बहाल करने से पहले निर्माता को बताना होगा खराबी का कारण, सुधारात्मक उपायों का भी होगा सत्यापन

नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026। देश में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने नियामक व्यवस्था को और सख्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत निर्धारित महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरने वाली दवाओं को गैर-मानक गुणवत्ता (Not of Standard Quality-NSQ) घोषित किए जाने पर संबंधित दवा के निर्माण लाइसेंस को तत्काल निलंबित करने का प्रावधान किया गया है।

मंत्रालय का यह प्रस्ताव दवाओं के निर्माण और वितरण की निगरानी को प्रभावी बनाने के साथ मरीजों को संभावित स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का मानना है कि किसी दवा के गुणवत्ता परीक्षण में विफल पाए जाने के बाद नियामक कार्रवाई में देरी होने से वह दवा बाजार में उपलब्ध रह सकती है। इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और बाजार से दवा वापस मंगाने की प्रक्रिया जटिल होने की आशंका रहती है।

पांच महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर होगी तत्काल कार्रवाई

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार सरकारी विश्लेषक की जांच रिपोर्ट में किसी दवा को पांच महत्वपूर्ण मानकों पर गैर-मानक घोषित किए जाने की स्थिति में केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण अथवा संबंधित राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण तत्काल उसके निर्माण लाइसेंस को निलंबित कर सकेगा।

इन पांच मानकों में दवा में सक्रिय औषधीय घटक की निर्धारित मात्रा (Assay), दवा के घुलने की क्षमता (Dissolution), संबंधित पदार्थों की मात्रा (Related Substances), अशुद्धियां (Impurities) और जीवाणु रहित होने की गुणवत्ता (Sterility) शामिल हैं।

ये सभी मानक किसी दवा की प्रभावकारिता, शुद्धता और सुरक्षा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके निर्धारित स्तर पर खरा नहीं उतरने से दवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और मरीजों के लिए जोखिम उत्पन्न हो सकता है।

सुधारात्मक उपायों के बिना नहीं मिलेगा लाइसेंस

प्रस्तावित नियमों में केवल लाइसेंस निलंबित करने की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि उसे दोबारा बहाल करने के लिए भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। संबंधित दवा निर्माता को गुणवत्ता में कमी के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) करना होगा।

इसके बाद निर्माता को सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई (Corrective and Preventive Action-CAPA) लागू करनी होगी। संबंधित लाइसेंसिंग प्राधिकरण इन उपायों की जांच और सत्यापन करेगा। निर्धारित सुधारात्मक उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन की पुष्टि होने के बाद ही निलंबन समाप्त किया जा सकेगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल औपचारिक सुधार के आधार पर दवा का निर्माण दोबारा शुरू न हो, बल्कि गुणवत्ता में कमी के मूल कारणों को दूर किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

नियामक एजेंसियों के बीच बढ़ेगा समन्वय

मंत्रालय ने सरकारी विश्लेषक की परीक्षण रिपोर्ट से संबंधित फॉर्म-13 में भी संशोधन प्रस्तावित किया है। इसके तहत रिपोर्ट की प्रतिलिपि भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI), संबंधित राज्य अथवा केंद्रशासित प्रदेश के औषधि नियंत्रण प्राधिकरण तथा संबंधित दवा निर्माता और विपणनकर्ता को भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

इसके अतिरिक्त केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण निर्माता से मूल कारण विश्लेषण, सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट सहित राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा की गई अंतिम कार्रवाई का विवरण भी मांग सकेगा।

30 दिनों में मांगे गए सुझाव

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन संशोधनों के लिए औषधि नियम, 1945 के नियम 85 और 122O में नए प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में 28 अक्टूबर 2026 को जारी प्रारूप अधिसूचना जीएसआर 956(ई) को 4 नवंबर को सार्वजनिक किया गया। प्रस्तावित नियमों पर संबंधित पक्षों और आम नागरिकों से राजपत्र की प्रतियां सार्वजनिक होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

सुझाव मंत्रालय के अवर सचिव (औषधि), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली को भेजे जा सकते हैं। इसके लिए ई-मेल पता drugsdiv-mohfw@gov.in निर्धारित किया गया है।

सरकार की इस पहल से दवा निर्माण उद्योग में जवाबदेही बढ़ने, गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित होने और मरीजों को सुरक्षित एवं प्रभावी दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। यह संशोधन लागू होने के बाद गुणवत्ता संबंधी गंभीर खामियों पर कार्रवाई के लिए नियामक एजेंसियों को अधिक प्रभावी अधिकार मिल सकेंगे।

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